“CORRUPTED THINKING DIFFERS PURE THINKING”


………………………….small type of corrupt  thinking to pure thinking…………………………
मै-:”मेहनत करे जा फ़ल की चिन्ता मत कर” मे तो इस बात पर भरोसा करता हु भाई! क्या आप करते हो?
फ़ैजाद मेहमूद-: मेरे भाई मै मनता हु तुम्हारे पास एक कफ़ि अच्छि सोच है जिसके बल पर तुम वो क्या केह्ते है अन्ग्रजी मै हा…… याद अया “कोम्प्लिमेन्ट” पा सकते हो… लेकिन अगर तुम अब भी ये हि सोचते कि वो क्या कह रहे थे तुम हू…..”मेहनत करे जा फ़ल की चिन्ता मत कर” तो भाई रेहने दो ये गलत है…. कह रहा हु अभि भी ये सोच छोड. दो अगर अपनी सोच नहि बदलना चाह्ते तो मरो तुम्हरा इन्त्ज़ार भ्रष्ठाचार कर रहा है…..
मै -: मै तुम्हरि बात का समर्थन करता हु पर मे अपनी पुरी जिन्दगि समाज की बुराइयो का पर्दाफ़ाश करने के लिये लडना चाह्ता हु! ओर इसलिये तो जोर्नलिस्म हि मेरा सब कुछ है भाई! हा मै जानता हु मे समाज को नाहि बदल सकता लेकिन मे समाज की तरह नहि बन्ना चाह्ता ओर इसलिये हि मे थॊडि सी तो कोशिश कर सकता हु ना??”…………………..

Advertisements

Leave a comment

Filed under Society in modern India

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s