“अशलीलता से “TRP” तक का सफ़र “बिग बॉस”


“बिग बॉस”… बिग बॉस.. इस नाम से साफ़ अर्थ निकलता है “सबका बोस”। इस समय यहा हम बात करने जा रहे “बिग बॉस(सीजन- 4)” सीरीयल की जो कुछ ही सालो में दर्शको के बीच मजबूत पकड बनाये रखते हुये सफ़लता की उचाईं को छू चुका है। और आजकल भारतीय चैनल कलर्स पर सोमवार से शुक्रवार रात 9  से  10 बजे तक प्रसारित किया जा रहा है। इस बार इसके निर्माता भारतीय ना होकर एक विदेशी हैं जिनका नाम “जीशस जार्ज” है।

हम सभी बेखूबी जानते है कि आज का समय “मार्किटाईजेशन” या “बाजारीकरण” का समय है जिसमे हर एक व्यापारी अपनी वस्तु को कैसे भी करके बैचने के लिये और ज्यादा से ज्यादा लाभ बटोरने के उद्देश्य से लोगो को अपनी वस्तु की ओर आकर्षित करने में जरा भी चूकने को तैयार नही हैं। जाहिर सी बात है की भारतीय बाजार मे तीव्र प्रतियोगिता तो होनी ही है। इस बात को अपने जेहन में उतारते हुऎ अगर हम इस समम भारतीय टी०वी० चैनल “कलर्स” पर सोमवार से 9 बजे से 10 तक प्रसारित होने वाले कार्यक्रम “बिग बॉस सीजन- 4” पर नजर डाले तो साफ़ झलकता है कि कहीं ना कहीं एक उत्पादक अपनी वस्तु को किसी ना किसी रूप में अधिक लाभ बटोरने के उद्देश्य से बैच ही रहा है। “बिग बॉस सीजन- 4” में जहां पर उत्पादक का उद्देश्य अधिक लाभ तो कमाना है। लेकिन यहां उत्पादक का लाभ कमाने का तरिका “50 पर्सेन्ट डिस्काउन्ट वाले बजार”से बिलकुल हटके साबित होता है। क्योकिं आधूनिकता के नाम पर ज्यादा से ज्यादा दर्शको को लुभावने जाल में फ़ासने के लिये अब “अशलीलता” का साहरा ले रहे हैं बिगबास का नेत्रत्व करने वाले। बिगबास जैसे कार्यक्रमो में अश्लीलता को दर्शको के इस “टी० आर० पी०” नाम के थाल में परोसे जाने का अन्दाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि प्रोड्युसर “जीशस जार्ज” ने केनाडा की “सेक्सी लैडी” मानी जाने वाली “पेमला एण्डरसन” को
एक मेहमान के तौर पर ढाई करोड रुपय देकर मेहज तीन दिनो के लिये बिगबास के घर में दाखिल कराया गया। पेमला एण्डरसन को बिगबास के घर में भेजने के उद्देश्य के पीछे का झमैला तो हम समझ ही गये होगें कि इस सेक्सी मेहमान का भला बिगबास के घर क्या काम….। चलो जब पेमला  बिगबास के घर में आ हीं गयीं थी तो कम से कम कपडे तो पेहन के रहना चाहिये था। उन्हे देख कर तो ऐसा लग रहा था कि जैसे बिगबास ने घर में दाखिल होते ही उनके सारे कपडे छीनकर उनसे सिर्फ़ बेड की चादर के टुकडो को नग्न बदन पे लपेटने को कह रखा हो। अब इसमें पेमला को दोष देना ठीक नही होगा  क्योकीं उन्हे तो कुछ इसी तरह का रोल निभाने के लिये बकायदा धनराशी दी गयी थी। वो तो सिर्फ़ अपना काम कर रही थी। यहा तक की शूरू से ही बोम्बे (बान्द्रा) में अवेध रूप से बिना परमिशन के चलाये जाने की वजाह से विवादो में रहा “बिग बॉस सीजन- 4” पर टी० आर० पी० के नाम से अशलीता परोसे जाने की वजाह से राजनैतिक स्तर पर और जनता में प्रति-क्रिया आने पर प्रसारण मन्त्रालय की तरफ़ से “नो बजे प्रसारण रोको… ग्यारह बजे प्रसारित करो” आदेश जारी किया गया। लेकिन लाभ कमाने में अन्धे हो चुके टी० वी० जगत के इन लोगो को इसकी भी कहां परवाह थी। पैसा ही बोला और कलर्स चैनल ने इस आदेश के खिलाफ़ बोम्बे हाईकोर्ट में अर्जी लगादी… और होना क्या था। बोम्बे उच्चन्यालय ने “आल्सी” रवैया अपनाते हुये “बिग बॉस सीजन- 4” को अपने पहले निर्धारित समय के अधार पर चलते रहने का आदेश जारी कर मामले को रफ़ादफ़ा करने का रुख अपना ही लिया। फ़िर प्रसारण मन्त्रालय भी क्या करता। धीरे- धीरे मन्त्राललय भी अपने आदेश पर चुप्पी बानाये रखते हुये हार ही गया।

मालिश का सिलसिला:
वेसे हम अगर बिगबास के पिछले इतिहास पर नजर डालते हुये  “बिग बॉस सीजन- 4” तक के  द्र्श्यों को देखें तो मालीश का सिलसिला तो मशहूर होने की सीढी चढता ही जा रहा है। अब तो ऐसा लगता है कि जैसे मालिश करना-कराना बिग बास में कोई जरूरी हिस्सा बन गया हो। जहां हम सीजन-2 में रहुल महाजन को पायल राहतोगी की मालिश या पायल को राहुल महाजन की मालिश करते हुये देख चुके हैं। जिसके जरिये बिग बास सीजन-2 बहुत लोकप्रिय भी हुआ था। सीजन- 2 में ही मालिश करने-कराने सिलसिला नहीं थमा बल्कि ये मालिश करने-कराने की झलकियां सीजन-3 में भी देखने को मिली। सीजन- 2 में जहां रहुल महाजन को पायल राहतोगी की मालिश करते देखा जा रहा था वहीं सीजन-3 में प्रवेश राणा को जर्मनी की निवासी और मोडल “क्लाउडिया शिस्ला” की मालिश करते देखा गया। और आज कल चल रहे “बिग बॉस सीजन- 4” की बात करे तो जब देखो पाकिस्तान की निवासी वीना मलिक ज्यादा ही कुछ करीब बेठ कर अदाये दिखाती हुई अशमित के सिर की मालिश करने में तो ऐसे लगी रहती है जैसे बिग बास के घर में उनको मालिश करने के लिये ही स्पेशल बुलाया गया हो।
कहीं ऐसा तो नही कि बिगबास सीरीयल के लिये स्क्रिप्ट तैयार की जाती हो और फ़िर बिग बॉस  में आये सभी लोग उस स्क्रिप्ट के अनुसार अपनी भूमिका अदा करते हों। कहीं ना कहीं “मालिश” के सिलसिले में भी अश्लीलता ही नजर आती है। स्क्रिप्ट पहले से तैयार होने की इस बात का अन्दाजा सिर्फ़ मालिश करने-कराने की बात से ही नही लगाया जा रहा बल्कि इसका एक दूसरा पहलू भी है। और वो पेहलू है गन्दी गाली गलोज के साथ लड़ाई। इस पेहलू की चर्चा काल्पनाशील विचारात्मक रूप से इस मालिश के विचार से हटकर किया जाये तो ज्यादा सहज हो सकता है।…

अशलील गाली गलोज के साथ लड़ाई:
बिग बॉस सीरियल के अभी तक तीन सीजन बडी ही सफ़लता की उचाईयों को छूते हुये गुजर चुके है। और सीजन- 4 चल रहा है जो सोमवार से शक्रवार  रात 9  से  10 बजे तक प्रसारित किया जा रहा है। अगर हम बिग बॉस में अश्लील गाली गलोज के साथ लडाई पर रोशनी डालते हुये  बिग बॉस के पिछले इतिहास को खोल के देखे तो हर साल बिग बॉस के घर में किसी ऐसे एक या दो व्यक्तियों को दाखिल कराया जाता है जो अपनी भाषा पर काबू नहीं रख पाते और ज्यादा ही कुछ लड़ाकु किस्म के व्यक्ति होते है। जो अपने आपको छोटी से छोटी बात पर नेशनल चेनल पर पूरी दुनिया के सामने अश्लील गली-गलोज करने से नहीं रोक पाते और इसके साथ- ही साथ वो ये तो बिलकुल सोच ही नही पाते की इनकी इन अशलील हरकतो का समाज के अलग-अलग वर्गो पर खासकर कम उम्र के वर्गो पर जो अभी शिक्षा की सीढीयॊं पर ही चल रहे है उन पर क्या और कैसा प्रभाव पड रहा है।
बिग बॉस सीजन-1 में अपने आपको चरित्रवान समझने वाली बिलकुल चरित्रहीन राखी सावतं जो अपने शब्दो पर बिलकुल भी काबू नही रख पाती उनको टी० आर० पी० के लिये एक लड़ाकू तत्व के रूप में दाखिल कराया गया। वहीं सीजन- 2 में राजा चौधरी और सम्भावना सेठ की भेजा गाया और
सीजन-3 में कमाल रशीद खान की एक लड़ाकू तत्व के रूप में एन्ट्री हुई। और आज कल चल रहे “बिग बॉस- 4”  गन्दी गालीयों का इस्तेमाल करने वाली और सबसे ज्यादा हल्ला गुल्ला करने वाली “डोली बिन्द्रा” एक लड़ाकू तत्व के रूप में अपनी भूमिका अदा कर रही है। तो जाहिर सी बात हैं टी० आर० पी० बटोरने के साथ लाभ बिग बॉस  को चलाने वालो को ही मिल रहा है।
इन तमाम एक समानताओं को देखते हुये तो यही अनुभव होता है की बिग बॉस रीयलिटी शो के लिये पहले से ही कोई स्क्रिप्ट तैयार की जाती है और सभी प्रतियोगी लिखित स्क्रिप्ट के अधार पर अपनी भूमिका को निभाने की कोशिश करते है।

प्रभाव:
अब हम बात करे की बिग बॉस में घटित हो रहे व्यवहार का समाज पर ऐसा क्या प्रभाव पड़ रहा है। तो आज के जमाने और आधुनिकता को देखते हुये
बिग बॉस में सभी बाते समान्य सी लगती हैं। लेकिन कहीं ना कहीं अगर देखा जाये तो हमारे देश के हर वर्ग के लोगो को इन टी० वी० जगत के कलाकारो के वास्तविक व्यावहार का पता चल रहा है और इनके ऐसे समान्य और असमान्य व्यावहार से आम लोग भी अपने आपको जोड़ कर देखते है क्योकिं किसी ना किसी रूप में समाज में कहीं ना कहीं ऐसा ही होता है और हो रहा है। इसके अलावा आम आदमी के मन में एक प्रेरणां जागती है की हम भी क्यों नही बन सकते उनके जैसे कलाकार क्योकिं हर एक व्यक्ति के अन्दर कोई ना कोई कला छुपी ही होती है। अगर हम बिग बॉस में घटित हो रहे व्यावहार का बुरा पभाव क्या पड़ रहा है और कैसा पड़ रहा है। तो हम कह सकते है की ऐसे रियलिटी शो में हो रहे व्यावहार का प्रभाव विशेष रूप से 5 से 16 के बीच की उम्र के बच्चो पर ज्यादा पड़ रहा है क्योकिं अगर हम एक मनोविग्यान के नजरिये से  देखें तो  5 से 16 के बीच की उम्र में हर एक मस्तिष्क और शारीरिक विकास के दोर से गुजर रहा होता है। इस उम्र में, हर एक के मन में किसी भी चीज को जल्द से जल्द जानकर उसे
खुद करने की “जिग्याशा” होती है जिसका एक बहुत ठीक उदाहरण है कि दूरदर्शन के मशहूर नाटक “शक्तिमान” में शक्तिमान के किरदार की लगभग नकल इस उम्र के बीच का हर बच्चा खुद करना चाहता था। जिसके कारण गोल-गोल घूमने के जोश में कई बच्चो की छत से कूदने की खबरे बड़े जोर- शोर से आ रही थी। बड़े या जवान या 18 साल के या इससे ज्यादा के उम्र के लोगो पर बिग बॉस में दिखाये जा रहे व्यावहार का ज्यादा कुछ प्रभाव नही पड़ता है क्योकिं 18 साल के या इससे ज्यादा के उम्र के लोग लगभग सही और गलत के बीच का फ़ासंला समझने लगते है।

सुझाव: अन्त मैं अगर अपना सुझाव इस बारे में देना चाहु तो यही दूगां कि ये एक समाज की गम्भीर सम्सया है जिसके बारे में प्रसारण मन्त्रालय या सरकार को गम्भीर कदम उठाते हुये सोचना  होगा। या कोई ऐसा विभाग गठित किया जाना चाहिये जो हर साल कार्यक्रमो की अलग से एक सूची तैयार करे और उसमें से गलत प्रभाव डालने वाले कार्यक्रमो को अलग करते हुये उनकी एक सूची बनाले जिनका प्रसारण होने का समय विभाग खुद तय करे और इसके साथ अगर ऐसे कार्यक्रमो में कुछ भी नियम के अनुसार ना लगे तो उसमें काटं-छाट करने का अधिकार भी विभाक के पास हो। और इसके अलावा विभाग के फ़ैसंले में किसी भी न्याल या जाचं सम्बधी किसी भी डिपार्टमेटं द्वारा कोई भी भूमिका अदा नही की जाये।

Written By: Anil Kumar


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2 Comments

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2 responses to ““अशलीलता से “TRP” तक का सफ़र “बिग बॉस”

  1. शोहरत और टी आर पी का जमाना है.
    और फिर भईया धन भी कमाना है

    • wo to hai bhai… lekin agar har cheej niyam kaanoon ke saath nahi chal sakti to kamse kam national channel par ashleel gaaliyo ke sath ladai to na ki jaye……
      isse kam umar ke bachcho par manovigyanik prbhav padta hai…

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