होसला बुलंद और दृढ़ इच्छा की एक मिसाल


राजस्थान के भरतपूर से अपनी मंडली के साथ आये भपंग वादक और अपने “सारी दूनिया में फ़ैली टर-टर” फ़ोक गीत से काफ़ी चर्चा में रहे लगभग पचास साल से ज्यादा की उम्र के गफ़रुदीन मेवाती ने इन्द्रा गान्धी कला केन्द्र में जब अपनी मंडली के साथ अपने भपगं के तारो को छेड़, फ़ोक गीतो को प्रस्तुत किया तो वहां मोजूद सभी लोग उनके गीतो पर आन्दित होने को मजबूर हो गये। गफ़रुद्दीन ने अपने 14 साल के बेटे शाहरूख मेवाती को भी फ़ोक गीत गाने और भपंग बजाने में माहिर बना दिया है, जो उनकी मंडली में शामिल होकर उनकी सहायता करता है। इंडिया गोट टेलेन्ट मे अपनी किस्मत आजमा चुके गफ़रुदीन ने सफ़लता ना मिलने पर कभी होसला और दृढ़ इच्छा शक्ति को बनाये रखने में कोइ कमी नही छोड़ी। गफ़रुदीन से बात करने पर गफ़रुदीन ने बताया की उन्हे फ़ोक गीत गाने और सांस्क्रतिक कार्य क्रमो में भाग लेने में 14 साल की उम्र से ही रूची है। उन्हे आज से 40 साल पहले 18 साल की उम्र में “संगीत नाट्क अकादमी” के आधिकारी और पदम-श्री अवार्ड से सम्मानित कोमल कोठयाअरी ने राजस्थान क्षेत्र से बाहर आकर दिल्ली में अपनी कला को प्रदर्षित करने का सबसे पहला और एक बड़ा अवसर प्रदान किया। तब से लेकर आजतक गफ़रुदीन ने अपने फ़ोक गीत गाने की परम्परा को निभाने के साथ-साथ दुनिया भर में अपनी कला का प्रदर्षन करते हुये काफ़ी सफ़ल अनुभव जुटाये। गफ़रुद्दीन की कला से प्रभावित होकर दुनिया में जाने-माने लंडन के मशहूर तबला वादक “पीट लोकेट” ने गफ़रुदीन को लंडन आकर भारतीय संस्क्रति की छाप छोड़ने का न्योता भी दे दिया। गफ़रुदीन अब लंडन में भारतीय फ़ोक गीतो के जरिये भारतीय संस्क्रति का प्रदर्षन करेगें।

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