वी० आई० पी० लोगो से चोरो को खोफ़ नही, तो आम आदमी तो गया!


बेखोफ़ चोर

दिल्ली में आये दिन चोरी की वारदातें अकसर सुनने को तो मिल ही जाती हैं, ऐसा लगता है कि जैसे अब चोरी-डकेती से दिल्ली का जन्मो-जन्मो का साथ है! ताज्जुब की बात तो ये है कि जहां दिल्ली के दक्षिणी पश्चिमी,उत्तरी,पूर्वी इलाको में चोरो को चोरीयों की वारदातों को अंजाम देते समय कानून का बिलकुल खोफ़ नही होता, जिससे आये दिन अखबार में दिल्ली में बढ रहीं चोरीं की वारदातें लगातार बनी रहती हैं, वहीं मध्य दिल्ली यानी इंडिया गेट के आस-पास का इलाका जो देश के वी० आई० पी० इलाको में से एक है, में चोर चोरी करते समय एक बार भी खोफ़ नही खाते। कहते हैं कि शाहंजहां रोड, तुगलक रोड, पंडारा रोड, और संसद मार्ग आदी इलाको के चप्पे-चप्पे पर पुलिस की नजर हर वक्त बनी रहती। पर ये बात तब झूटी हो जाती है जब हम कुछ वारदातों पर नजर डाले-

१. इलाका संसद मार्ग और 24 मार्च की सुबाह की बात है। एक महिला टहलने निकली हुई थीं कि अचानक उनके सामने एक बाईक आकर रुकती है, महिला एक दम चैन की सांस लेती है क्योकिं उन्हे लगा कि कहीं उन्हे(महिला) टक्कर ना लग जाये, इसलिये उस पर सवार दोनो युवको ने बाईक रोकी है। लेकिन महिला का ये सोचना सरासर गलत था। क्योंकि जैसे ही दूसरो को सरीफ़ समझने वाली उस महिला ने वहां से आगे कदम बढाया, तभी उस बाईक पर सवार एक युवक तेजी के साथ उतरा और उस महिला के पास तक आया। आप सोच रहे होगें कि वह युवक उस महिला से अपनी गलती की माफ़ी मांगने आया होगा। लेकिन ये भी गलत है क्योंकि जब तक वह महिला कुछ समझ पाती उतनी ही देर में युवक ने महिला के गले में पड़ी चेन खींची और अपने साथी के साथ बाईक स्टार्ट कर सेकण्डो में ही चम्पत हो गया। अब आपको मैं एक बात और बता देता हुं जिससे शायद आप हेरान रह जायें, क्योंकि वह महिला कोई आम महीला नही थी बल्कि इंडिया गेट के आस-पास रहने वाले किसी सांसद की पत्नी थीं।

२. इलाका तुगलक रोड और तारीख 24 मार्च। चोरो ने इस बार तुगलक रोड पर एक कोठी में अपने इरादों को अंजाम देना चाहा। चोर कोठी में घुंसे और कोठी के गैराज का ताला तोड़ जितना समान हाथ लगा, सब लेकर चम्पत हो गये। अब आप शायद और भी ज्यादा हेरान रह जायेंगे। क्योंकि बात ही कुछ ऐसी है। हेरानी की बात ये है कि तुगलक रोड स्थित जिस कोठी में चोरो ने अपने इरादों को अंजाम दिया, वह कोठी किसी व्यावसायिक या व्यापारी की नही बल्कि भारत सरकार के केंद्रीय पर्यावरण व वन मंत्री जय राम रमेंश की है।

अब बात आती है कि अगर दिल्ली में वी० आई० पी० लोगो से चोर खोफ़ नही खाते तो आम आदमी उनके सामने क्या चीज है। अब चलिए आम आदमी के क्या हाल हैं वो भी जान लेते हैं-

३. रमेश (बदला हुआ नाम) राजस्थान सरकार के मध्य दिल्ली स्थित एक कार्यालय में कार्यरत हैं और शहाजहाअं रोड स्थित सरकारी मकान में अपने परिवार के साथ रहते है। रमेश जी के घर में तीन बार चोर रात में बेखोफ़ होकर चोरी को अंजाम दे चुके हैं। पर अभी तक किसी कड़ी कार्यवाही के तहत किसी भी चोर को धर-दबोचा नही गया है। तारीख 20 मार्च ठीक होली वाली रात को चोरो ने रमेश जी के घर में तीसरी बार फ़िर से चोरी करी। अब जोर देने वाली बात यहा पर ये है कि अभी तक कोई भी चोर पकड़ा नही गया है। इससे दिल्ली पुलिस की ढीली कार्यवाही का साफ़ पता चलता है।

अब सवाल ये है कि आखिर चप्पे-चप्पे पर नजर रखने वाली दिल्ली पुलिस करती क्या है कि चोर उन्हे नजर ही नही आते??
यहां भी पुलिस के ठीक वैसे ही ढीला हाल हैं जैसे दिल्ली के दूसरे इलाको में है।

अब साफ़ समझ आता है कि दिल्ली पुलिस हो या कोई भी कानून का रखवाला किसी को भी परवाह नही अपनी कर्तव्यों का सही रूप से पालन करने की। पता नही दिल्ली पुलिस की पी० सी० आर० वेन चप्पे-चप्पे पर तेनात रहते हुये ऐसे कोन से काम में व्यस्थ हो जाती है कि उनतक दीन-दुनिया में अंजाम दी जारी वारदातों की एक भनक तक नही पहुच पाती??

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