कभी आईपीएल के सरताज पर अब भगोड़ा हैं ललित मोदी


कल था आइपीएल का सरताज़ लेकिन लालच ने बना दिया...घोटाले बाज़ो का सरताज़

इंग्लेण्ड से जन्मा क्रिकेट आज एक ऐसा खेल बन चुका है जिसका नाम भारत में ही नही बल्कि विश्व में लगभग हर एक व्यक्ति की जबान पर रटा हो सकता है। फ़िर चाहे लोगो की जबान पर क्रिकेट प्रेम के रूप में हो या रातोरात अमीर कर देने वाले सट्टे के रूप में या बडी से बडी हस्तियों जैसे उधोगपतियों,राजनेताओ अभिनेताओं आदि की जबान पर ज्यादा से ज्यादा पैसा कमाने के जरिये के रूप हो… लेकिन रट जरूर गया है। खासकर भारत वर्तमान युग में विश्व में सबसे ज्यादा क्रिकेट प्रेमी देश कहा जाने लगा है। लोगो के इसी उत्साह और क्रिकेट के प्रति प्रेम को देखते हुये भारतीय क्रिकेट बोर्ड यानी बी०सी०सी०आई० ने आई०पीएल नाम की परत के पीछे छुपे एक जुआ रूपी सट्टे की शुरूआत की। अजब और गज़ब बात तो ये रही कि खेल को ज्यादा से ज्यादा रोमांचित बनाने और ज्यादा से ज्यादा पैसा बटोरने के लालच के कारण महज बीस ओवरो को निर्धारित किया गया। खेर ये तो होना ही था क्योंकि कहते है ना “मुह के अन्दर जितना बडा कोर डालने की आदत पड जाये तो मुह में एक दिन वही कोर छोटा लगने लगता है तो होना क्या है मुह उससे भी बडे कोर की मांग करता है” बस इसी लालच या पैसो की भूख ने खेल की परत के पीछे छिपे आईपीएल जैसे सट्टे को जन्म दिया। पता नही कब से पीछे छुपा बेठा एक सट्टे बाजो का सरताज़.. वो है ललित मोदी।
आइए जान लेते है आईपीएल के अध्यक्ष पद पर बेठ क्या गुल खिलाए… कि पद से ही निलम्बित कर दिये गये जिसके चलते आज भी मोदी किसी तरहं तमाम आरोपो से बच निकलने की जुगत में लगे हुये हैं।
पिछले साल 2010 में आईपीएल-3 का विवाद ललित मोदी के लिये एक श्राप जैसा ही साबित हुआ जो उन्हे आज भी भागने पर मजबूर कर रहा है।   मोदी आईपीएल की कमान संभालने वाले एक कामयाब कमिशनर के रूप में जाने जाते थे लेकिन आईपीएल-3 के दोरान टीमो की बोलीयां लगने में भारीभरकम 470 करोड के वित्तीय घोटाला करने के आरोप में आईपीएल के अध्यक्ष के पद से आईपीएल-3  के खत्म होते ही तुरंत निलम्बित कर दिये गये थे। निलम्बित करने के बाद ही घोटाले के आरोपो की जांच का काम ईडी अर्थाथ प्रवतन निदेशालय और बी०सी०सी०आई० की अनुशासनात्मक कमेटी को सोंपा गया। अगर हम ईडी की पडताल की माने तो मोदी को वित्तीय अनियमित्ताओं में लगभग आरोपी पाया जा चुका है और ये मुकदमा मुम्बई हाईकोर्ट में चल
रहा है।

हमारी सरकार को एक बात जरूर खटकनी चाहिये थी पर नही खटकी
वो ये कि एस खेल की लगभग एक सट्टे या जुऎ जैसी ही परिक्रिया है,
जिसके अनतर्गत देश की कोई भी बडी हस्ती अपने पैसे के बल पर खिलाडीयो
की बोली लगाकर अपनी एक टीम घोंषित कर मैदान में उतार सकती है।
ये रही अलग बात हद तो तब हो गयी जब कोई भी बडी या नामी हस्ती
इस खेल में किसी भी टीम के नाम पर लाखो-करोडो रुपयों का सट्टा रूपी निवेश करने
की परिक्रिया चालू भी हो गयी पर सरकार मोटे राजस्व के लालच तले दबकर
इस जुऎ को अपनी नाक के नीचे पनपने देती रही और दे भी रही रही है।
और जब इस मामले का हल खोजते हुये मीडिया ने इस पर अपने
अलग-अलग विशलेषण प्रस्तुत किये, तब जाकर सरकार नींद से जागी
जब ललित मोदी जैसी चिडियां खेत चुक गयी।

ललित मोदी ने जो आईपीएल के बतोर अध्यक्ष के रूप में काम कर रहे थे। पता नही लालच का ऐसा क्या भूत सा सवार हुआ कि विवाद से पहले जितना नाम कमाया था… वो नाम तो खोया ही साथ ही साथ काम भी खोया वो अलग। इतना तो सब ही जानते है कि बुरे वक्त में कोइ भी साथ नही देता और ऐसे में जिन हस्तियों ने भारी-भरकम घोटाला करने में उनका साथ दिया होगा वो भी बिचारे मोदी को बलि का बकरा बनाकर ऐसे हो गये होगें जैसे उन्हे वो जानते ही नही। अब ललित मोदी भी सभी भ्रष्ट अफ़सरो की तरहं ही उन पर लगे वित्तीये अनियमित्ताओ सहित तमाम आरोपो से बचते हुये, सभी आरोपो को गलत ठहरा रहे है। जबकि प्रवतन निदेशालय ने अपनी जांच में ललित मोदी को वित्तीये अनियमित्ताओ के सभी आरोपो में लिप्त पाया है। चलो मान भी लिया जाये कि ये सारे आरोप एक राजनेतिक साजिश है। तो अभी तक मोदी जांच कर्ताओं के सामने खुल कर पेश क्यों नही हुये? क्यों जाच अधिकारीयों द्वारा कई बार बुलाने पर वह पेश नही हुये और लंडन से ही मोर्चा खोले बेठे है। आपको बतादू कि मोदी लंडन में है। ऐसे में सभी जांच अधिकारीयों का शक और भी गहराता जा रहा है।

मोदी के खिलाफ़ कोर्ट ने 2010 में ब्लू-अलर्ट भी जारी कर दिया। जिसके चलते ललित मोदी के विदेश जाने -आने पर रोक लग हुई है। इसके साथ-साथ ललित मोदी का पास-पोर्ट भी रद्द कर दिया गया था।
हर बार मोदी जांचकर्ताओं के सामने शर्ते रख रहे हैं और कह रहे है कि अगर उनकी ये शर्ते मान ली गई तो वह लंडन से भारत आकर जांच ऎजेन्सीओ के सामने खुल कर पेश हो जायेगें। अगर ललित मोदी खुलकर पेश होते है तो हो सकता है इस घोटाले में लिप्त कुछ और बडी सक्सियतो के चेहरे भी बेनकाब हो जायें।
आइए ललित मोदी द्वारा रखी गयी कुछ शर्तो पर नजर डालें:-
१. पहली शर्त: ललित मोदी चाहते है कि उनका पास-पोर्ट, जो रद्द कर दिया जा चुका है, उसको जल्द-जल्द से जल्द जारी किया जाये।
२. दूसरी शर्त: वह तभी भारत आयेगें जब उन्हे ऎयर पोर्ट से सीधे गिरफ़्तार न किया जाये।
३. तीसरी शर्त: उन्हे और उनके परिवार को पूरी सुरक्षा प्रदान की जाये।
४. चौथी शर्त: उनकी विदेश यात्रा पर लगी रोक को हटा दिया जाये।
यहा ललित की तीसरी शर्त से तो एक बात साफ़ है कि कही न कही ललित मोदी खुद जानते है कि अगर जांचकर्ताओ के सामने ज्यादा खुल कर पेश हुये तो, उनके साथ घॊटाले में लिप्त अधिकारी लोग उनको नुकसान पहुचा सकते है। इसके अलावा ज्यादा चर्चा न करते हुये इन्ही चार शर्तों के अधार पर यही कहा जा सकता है कि अप्रत्यक्ष रूप से जाचंकर्ताओ को पीछे हटने के लिये बोल रहे है। क्योंकि भारत आकर ललित जांच के लिये जिस तरहं की शर्तें रख रहे, अगर वो सब मान भी ली जाती हैं तो जाहिर सी बात है कि एक पाक-साफ़ व्यक्ति की तरहं वह कहीं भी घूम फ़िर सकेगें और फ़िर जब इतना बढिया मोका हाथ लगे तो मोदी क्या कोइ भी गवाना चाहेगा। फ़िर होना क्या है जितने भी सबूत व तथ्य होंगे उन सभी  को मिटाने में जरा भी देर नही लगेगी।
इन विशलेषणात्मक बातो को देखते हुये यही समझ आता है कि ललित मोदी की  ये सभी शर्ते मोदी द्वारा उनपर लगे वित्तीय अनियमित्ता या 470 करोड रुपय के भारी भरकम्म घॊटाले के आरोपो को दरकिनार करते हुये दादागिरी को तोप्रकट कर ही रहे है इसके साथ ही आरोपो से बचने की एक बडी कोशिश भी झलकती है।

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