जिस देश में भूखे सोते है मासूम


भारत की गरीबी

भारत की गरीबी

भारत औद्योगिक या अन्य किसी क्षेत्र में पहले के मुताबिक भले ही काफ़ी विकसित क्यों न हुआ हो और चाहे भारतीयों को ये भ्रम क्यों न हुआ हो कि आज भारत एक विश्व शक्ति बन गया है। लेकिन सच्चाई ये ही है कि आज भी भारत में करोडो लोग, करोडो बच्चे भूखे सोते हें और मुश्किलों से एक समय का भोजन कमाने में जैसे-तैसे सफ़ल होते है, उसी से ही तीनो समय का गुजारा करने को मजबूर हैं और जहां 24 प्रतिशत बच्चे स्कूल की शक्ल ना देख पाये हों। उसी देश में एक तरफ़ मानव मानवता को भूलते हुये भक्ति के पीछे छिपी अज्ञानता के कारण महज तीन दिन में तीन करोड़ रुपये और अपनी अमीरी को दिखाने के चक्कर में चार करोड़ रुपये का मुकुट भगवान को भेंट देते हैं। ये इतनी भारी भरकम भेंट शिर्डी साईं बाबा मन्दिर में दी गयी है। इसको देखते हुये तो भारत में सारी समस्याओं की जड़ गरीबी कभी दूर होगी, ऐसी उम्मीद लगानी व्यर्थ सा लगता है। क्या हम ये सोचते है कि अगर भगवान को जितनी हज़ारो, लाखो या करोडो की भेंट चढ़ाएंगे तो उतनी ही हमारी सम्रद्धि बढेगी? सच बात तो ये है कि हम धीरे-धीरे मानवता के धर्म को भूलते जा रहे है और साथ में ये भी भूल रहे है कि भगवान भी मानव की ही समृद्धि या खुशी चाहता है। फ़िर भला वह क्यों हमसे किसी भी प्रकार की चीज की मांग करेगें। अगर तीन करोड़ और चार करोड़ जैसी भारीभरकम भेंट को ध्यान में रखते हुये भारत के सभी प्रसिद्ध मन्दिरो से लगभग 20 करोड रुपय भी अगर महिने के एकत्रित होते है तो अनुमान लगाया जा सकता है कि 5 साल में 12 अरब से भी ज्यादा रुपय एकत्रित हो सकते है जिससे हर पांच साल में भारत में एक विश्वविद्यालय खोलने की पहल करते हुये ढाचां तैयार किया जा सकता है या ये कहीये कि कई तमाम सुविधाओ से सम्पन्न स्कूल खोले जा सकते है। जिससे लाखो छात्र शिक्षा प्राप्त कर पाने में सफ़ल हो सकते हैं। इन भेंटो की आड़ में कई नकाबपोश कली कमाई रखने वाले अपनी कमाई को सफ़ेद करने के लिये भी ऐसा करते हैं। हां इसको रोकने के लिये एक उपाय जरूर कारगर साबित हो सकता है कि जो भी व्यक्ति किसी मन्दिर या कही भी हज़ारो, लाखो और करोडो या इससे ज्यादा रुपयों का दान देना चाहता है तो दान लेने से पहले इस बात की जांच स्वयं आयकर विभाग को करनी चाहिये कि जो पैसा वह देना चाहता, वह पैसा कहीं टेक्स चोरी या काली कमाई का पैसा तो नही। साथ ही साथ आयकर विभाग को ये भी जांच लेना चाहिये कि आखिर ये पैसा उसके पास आया कहां से और कहीं दान देने वाले व्यक्ति के उपर किसी प्रकार का अपराधिक मुकदमा तो दर्ज नही है। भारत में आज भी गरीबो को खाने के लिये मुश्किल से 2400 केलरी भी नसीब नही होती। साथ-साथ एक बडे अनुमान की माने तो भारत में 17 प्रतिशत बच्चे पांच साल तक की आयू तक आते-आते म्रत्यू को प्राप्त हो जाते हैं।
ये तमाम बाते आज के भारत में मानवता कहीं खो कर रह गयी है, इस बात को तो प्रमाणित करते ही है इसके साथ ही एक सवाल और खड़ा करता है कि आखिर कब तक करोडो-अरबो रुपय भगवान के नाम पर यूहीं बरबाद होते रहेगें या सोने-चांदी के मन्दिर बनते रहेगें और जनसंख्या का एक बड़ा तबका भूख और गरीबी की आंच में तपता रहेगा? ….. आखिर कब तक??

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