प्रथ्वी सुरक्षित तो हम सुरक्षित


ए० सी० जी० ग्रुप माईम की जोरदार परफ़ोरमेंस देने के बाद की फ़ोटो

“ग्लोबल वार्मिंग” अर्थाथ धरती पर लगातार बढता हुआ ताप। धरती पर बढते हुये तापमान से हमारे आस-पास के पर्यावरण को लगातार नुकसान पहुंच रहा है। कटते हुये पेड़, फ़ेक्ट्रीयों से निकलता हुआ धुंआ और केमीकल, बढता दूषित जल, वाहनो की तादात जिससे बढता वाहनो से निकलता धूं-धूं करता हुआ धुंआ,बढती हुई जनसंख्या से बढता हुआ प्लास्टिक से बने थेलो का उपयोग प्रर्यावरण को पूरी तरंह नष्ट करने पर उतारू हो चुका है। जैसा कि हम जानते है कि हम चारो तरफ़ से जिस भी आवरण से घिरे होते हैं वह पर्यावरण ही होता है, जो अब हमारे सतर्क न रहने के कारण नष्ट होने की कगार पर आ गया है। लगातार वातावरण या वायूमंडल में ओक्सीजन की मात्रा का स्तर गिरता जा रहा है। जो हमारे जीवन को अस्त-व्यस्त यानी नष्ट कर सकता है। तो अगर हम अब नही जागेगें और प्रथ्वी को बचाने के लिये प्रयास नही करेगें तो कब करेगें?
कहीं ऐसा न हो कि देर न हो जाये और “प्रथ्वी के नष्ट होने वाली है” जैसी भ्रमित करने वाली बाते सच हो जायें और हम देखने के लिये भी न बच पाये? अब वक्त आ गया है कि हम एक जुट होकर आगे आये और अपने पर्यावरण को को बचाने के लिये प्रयास करें और करने भी होगें क्योंकि अब हमारी जीवन  को सुरक्षित करने का जो सवाल है। हो सकता है एक दम से बहुत सारे प्रयास न कर पायें। पर शुरूआत में एक व्यक्ति भी अगर एक प्रयास करता है तो एक सौ बीस करोड लोगो का इकट्ठा प्रयास बहुत ही बढिया सिद्ध हो सकता है।
आइए कुछ शुरूआती महत्वपूर्ण क्या-क्या प्रयास किये जा सकते है, उनपर नज़र डालते है:  
१. सबसे पहले हम एक महत्वपूंर्ण कदम ये उठा सकते है कि पेड़ -पोधों को नुकसान न पहुचाये बल्कि ज्यादा से ज्यादा लगायें। जहां भी रहें अपने चारो तरफ़ हरियाली बनाये रखे और पोधों को लगाने के बारे में दूसरो को भी बतायें।
२. जितना हो सके साईकल या पेट्रोल या डीज़ल रहित बाईक को अपनाये। सार्वजनिक वाहनो से यात्रा करें। जिससे हवा में फ़ैल रही गाडीयों से निकलने वाले धुंऎ में मोजूद सोडियम कारबोनेट नाम की हानीकारक गैस को काफ़ी हद तक कम किया जा सकता है।
३. दिवाली पर पटाखे कम ही जलाऎं और दिवाली पर अपना ध्यान पटाखों से हटाकर रिस्तोदारो तथा परिवार के साथ मिठाई और स्वादिष्ट भोजन इसके अलावा मोज मस्ति से त्योहार को खुशनूमा बनायें क्योंकि दिवाली खुशी मनाने का त्योहार है और इसके लिये जरूरी नही कि हम पटाखें ही जलाऎं।
४. प्लास्टिक थेलों का उपयोग बहुत ही कम करें और जितना हो सके कूडा-कचरा न फ़ैलाएं।
५. पर्यावरण सुरक्षित करने के उपायों के बारे में दूसरो को जरूर बतायें।

पर्यावरण को बचाने के लिये दिल्ली की एक सस्था “ड्वलेपमेंट अल्टरनेटिवस” जो अपनी “क्लीन इंडिया” योजना के द्वारा खासकर पर्यावरणं पर काम करती है। सस्था ने एक सराहनीय कदम उठाते हुये 20 अप्रेल को नई दिल्ली स्थित नेहरू मेमोरियल,म्यूसियम लाईब्रेरी सभागार में “अर्थ डे” नाम से कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम को सफ़ल बनाने के लिये दिल्ली और एन०सी०आर० के लगभग दस से बारहा स्कूलो के छात्रो और सभी आमंत्रित अतीथि आदी पहुंचे। कार्यक्रम के मुख्य अतीथि पर्यावरण विभाग दिल्ली के  श्री धरमेंद्र  और एन० एम० एम० एल० की निदेशक श्री मती म्रादुला मुखर्जी ने अपने प्रोत्साहित करने करने वाले शब्दो से छात्रो और सभी श्रोताओं को संबोधित किया। कार्यक्रम की थीम का नाम “एन एक्ट ओफ़ ग्रीन” यानी प्रथ्वी को बचाने के एवज में पर्यावरण को बचाने का एक भी प्रयास एक बडा और बढिया परिणाम लाने में कारगर साबित हो सकता है। इसी थीम को ध्यान में रखते हुये लोगो को पर्यावरण अनूकूल प्रयास करने के लिये प्रेरित करने के उद्देश्य से विशेषकर ये कार्यक्रम रखा गया। वैसे क्लीन इंडिया की टीम द्वारा प्रेसंटेशन भी दी गयी लेकिन कार्यक्रम में मनोरंजन की शुरूआत दिल्ली के एक संगीत समूह “एकम सत्यम” ने की, जिसने परिपक्व लोगो को तो झूमने को मजबूर करते हुये, पर्यावरण आधारित गीतो से प्रथ्वी को सुरक्षित करने का संदेश जरूर पहुंचाया लेकिन छात्रो और युवाओं तक संदेश पहुंचाने में उन्हे काफ़ी मसक्कत करनी पडी। छात्र होते ही ऐसे है क्योंकि या तो उन्हे फ़िल्मी गीत की भाषा ही समझ आती या फ़िर गुदगुदाने वाले महत्वपूंर्ण पलो की। सो उनके लिये गुदगुदाने वाला वक्त आ ही गया। कार्यक्रम के दोरान  ए० सी० जी० (आर्ट ओफ़ किरयेटर ग्रुप) जो बुध्दीजीवी,छात्रो, तथा युवा कलाकारो का समूह है, जिसने “अर्थ सेफ़, वि सेफ़” अपने माईम अभिनय से सभागार में बैठे सभी लोगो को गुदगुदाते हुये हसने को मजबूर तो किया ही साथ ही अपनी प्रस्तूती से बडी सरलता से प्रथ्वी को सुरक्षित करने का सुन्दर संदेश भी सभी को दिया।

“खबर इंडिया”

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