एक बार वो पुड़िया मिल जाये तो शान में चार चांद लग जायें!


धंऎ में उड़ती जिंदगी

आज देश क्या.. समस्त विश्व में लोग धुएं से दोस्ती को अपनी शान समझने लगे हैं। धुएं के बिना पता नही आज करोड़ो-अरबो लोग अपना जीवन काट नही सकते। यहां किसी फ़ेक्ट्री से जुडे धुएं की बात नही हो रही बल्कि कहने का अर्थ ये है कि आज युवा हो या किसी आयु वर्ग का व्यक्ति बस तबांकू से भरा एक कश लगाने को मिल जाये तो शान में चार चांद लग जाये।

ये हम नही कह रहे बल्कि ऐसा उन लोगो का मानना है जो तंबाकू के आदी हो चुके है और शायद वे ये नही जानते कि जिस सिगरेट जैसी एक महज तंबाकू से भरी कागज की पुड़िया को हाथ में लेकर वह कश पर कश लगाते हैं और धुआं उड़ाते है उसी धुएं में वो अपने जीवन के एक-एक पल को धुआं समझ कर उड़ाते जा रहे हैं।

युवा वर्ग को दिन पर दिन खाता हुआ धुंआ

आज युवा वर्ग ही इसकी चपेट में इतना आ रहा है कि इसके बिना एक पल भी रह पाना उसके लिये इतना मुश्किल है कि मानो वो सिगरेट न हो गयी बल्कि अमरित से भरी कोई हंडिया हो गयी, जिसको पी जाने से जन्नत नसीब हो जायेगी।
ये एक ऐसी लत बन चुकी है जिसे एक बार जिसने सूंघा.. मानो इसका ही होकर रह गया। आज दिल्ली जैसे बड़े  शहरों में भले ही सार्वजनिक स्थान पर सिगरेट या तंबाकू के कश लगाने पर जुर्माने के आदेश को लेकर चर्चाऎं चल रहीं हों लेकिन सच्चाई को अनदेखा नही किया जा सकता। आज भी कई लोग ऐसे हैं जिन पर ऐसे आदेशो का कोई असर नही होता और ऐसे आदेशो की धज्जीयां उड़ाते हुये सार्वजनिक स्थान जैसे बस स्टेण्ड, रेलवेस्टेशन और बाजार आदि-आदि
… पर कश लगाने को अपनी शान समझते हैं, फ़िर चाहें इससे कोई जो इन सब चीजो से दूर रहता हो… उसे चाहे केंसर क्यों न हो जाये। ऐसे में सवाल उठते हैं कि इस पर किसी की प्रतिक्रिया क्यों नही होती और क्यों लोग ऐसे लोगो को रोकना पसन्द नहीं करते जो सार्वजनिक स्थान पर धूम्रपान या तंबाकू का सेवन करने से जरा भी नही चूकते।

भरे बाजार में भी हम सिगरेट पियेगें चाहे दूसरे को केंसर क्यों न हो जाये

तो एक बात साफ़ है कि आज तंबाकू से भरी सिगरेट का सेवन करने वालो की तादाद इतनी है कि उनके सामने तंबाकू का सेवन न करने वालों की संख्या बहुत ही कम है। ऐसे में तंबाकू से परहेज करने वाले लोग हाथी के सामने    चींटी के समान साबित होते है।                                               

कुछ त्तथ्यों की माने तो ये सच्चाई सामने आती है कि हर साल करीब 6 करोड़ लोग तबांकू का सेवन करने से मर जाते हैं। जाहिर है अगर ऐसा ही रहा तो ये आकडे इससे भी उपर जा सकते है। डब्लूचओ के शोध के अनुसार लगभग हर 7 सेकंड में सिगरेट पीने से एक व्यक्ति की मोत हो जाती है। अगर ये सच्चाई सिगरेट का सेवन करने वालो को बताई जाये तो इस बात को हस के टालने में वह अपनी समझदारी मानने की भूल कर बैठेगें। खासकर यूवा वर्ग इस सच्चाई को कतई मानने को तैयार नही होगा और अगर इस सच्चाई को मानते हुये उनमे से किसी एक ने सिगरेट पीना छोड़ भी दी तो कितने दिन के लिये छोड़ेगा एक दिन-दो दिन एक न एक दिन लोट कर इसे पकड़ ही लेगा या वह नही चाहेगा तो इस लत को दूबारा से सुंघाकर उसके ही कुछ साथी लोग घूम फ़िर के वहीं आने पर उसे मजबूर कर देगें। वास्तविकता तो ये ही है कि आज एक युवा समेत एक बड़ा भाग नशे की लत से जकड़ा हुआ है।

उम्र को भी धुंऎ के साथ उड़ाते लोग

कुछ तथ्यों की बात की जाये तो सिगरेट पीने वाले लोग उन लोगो से पंद्रह साल पहले मर जाते है जो सिगरेट नही पीते। सिर्फ़ चीन में ही 2 हजार लोग तंबाकू के कारण हर एक दिन में मर जाते है। चीन में इस आंकड़े  से अंदाजा लगाया जा सकता है कि भारत में चीन से ज्यादा तंबाकू खाया-पिया जाता है जो भारत में तंबाकू से मरने वाले ज्यादा होगें इस बात की और इशारा करता है। डब्लूएचो की रिपोर्ट से ये बात सच बात साबित हो जाती है। क्योंकि भारत देश में हर एक दिन में लगभग ढाई हजार लोग तंबाकू के इस्तेमाल से मर जाते हैं। इसके अलावा भारत का भविष्य कहा जाने वाला 55 हजार की संख्या में यूवा वर्ग रोजाना तंबाकू का सेवन शुरू करते हैं। भारत में तबंकू से मरने वालो की संख्या आने वाले समय में इससे ज्यादा हो जायेगी इसका अंदाजा तंबाकू के लगातार बढते इस्तेमाल के कारण बढती नशे की लत से असानी से लगाया जा सकता है। डब्लूएचो की ही रिपोर्ट के अनुसार इस समय तंबाकू का प्रतिदिन लत से पीड़ित होकर सेवन करने वालों की संख्या 1.1 अरब है जो 2026 तक बढ कर करीब 2 अरब हो जाना तय है।

लगातार बढती तादाद

चिंतनीय बात ये है कि जहां तंबाकू से मरने वालों की संख्या 4.9 अरब है तो वहीं तंबाकू से मरने वालों की तुलना में एचआईवी/एड्स से मरने वालो की संख्या कुल 3 अरब है। आज नशा कितना सिर चढ कर बोल रहा है इस बात का पता तो इन आंकड़ो से चल ही रहा है इसके अलावा ये भी अंदाजा हो रहा है कि आज नशे की लत ने कितनी गंभीर समस्या का रूप धारण लिया है। भारत में धुंऎ को अपनी गमों या दुखो को भुला देने का एक मात्र जरिया समझकर एक बड़ी मूर्खता दिखाने वालों की भी कमी नही है। भला अगर महज एक नशे से भरी कागज की पुड़िया के कश लगाकर अपने दुखो को भूला दिया जाता तो आज समाज में हर पल इतनी परेशानीयां उत्पन्न होती हैं कि हर कोई कश लगाते हुये धुंऎ को उड़ाता पाया जायेगा और फ़िर शायद ही कोई ऐसी जगहा बचेगी जिस जगांह पर कोई नशा करता न दिखे।
वास्तिविक्ता तो ये है कि ये एक लत होती है जो एक इंसान को पूरी तरहं बरबाद करके ही दम लेती है। भारत में नशा आज विकट समस्या बनकर भारतीय समाज को कुछ हटकर सोचने ही नही दे रहा है।

आज समाज की इस समस्या को हल करने के उपायों की खोज करनी होंगी, नही तो इसका परिणाम बहुत बुरा हो सकता है।

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1 Comment

Filed under मेरी आखों से....., need for aware, Society in modern India

One response to “एक बार वो पुड़िया मिल जाये तो शान में चार चांद लग जायें!

  1. Mohd.javed mansoori

    sahee kahaa bhai…………..bt this is very too late 4 me coz i hav started smoke….?

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