कैसी कल्पना की होगी, क्या बन गया भारत !


भ्रष्टाचार का गढ बनता जा रहा भारत, हमारे लीडर्स ने नही समझी तिरंगे की गरिमा ………

आज ही के दिन यानी 22 जुलाई के दिन ही हमारे देश के राष्ट्रीय ध्वज को पिगली वैंकया ने देश के समाज के सामने रखा था। तब शायद राष्ट्र तिरंगे की गरिमा को ध्यान में रखते हुये ही  समाज ने एक बहतर जीवन और बहतर देश की कल्पना की होगी। सन 1947 के दौरान देश के संविधान के अनुसार यह सुनिश्चित किया गया कि तिरंगे के प्रति देश का हर नागरिक सम्मान प्रकटक करेगा। पर सवाल तो यह है कि क्या हम तिरंगे की गरिमा को समझते हुये देश को उस पायदान पर ला पाये हैं जिस पायदान पर आज देश को आज होना चाहिये था। आज के भारत की हालत क्या हैं इस बात से हर एक नागरिक बखूबी वाकिफ़ होगा और इन हलातो की असल जड़ किया है इस बात को भी हम जानते हैं।

poor India

असल में देखा जाये तो देश में आज के हालातो की जिम्मेदार गरीबी थी, है और ठीक ऐसे ही हाल बने रहे और नोट-वोट की लूट खसोट का सिलसिला ऐसे ही चलता रहा तो यह कहने में कोई हेरत की बात नही रह जायेगी कि भविष्य में भी गरीबी देश को लंबे समय का ठहराव देने के लिये मुह फ़ाडे खडी होगी। यह बात भी किसी से छुपी नही रह पाई है कि गरीबी की भट्टी में आज भी तपता एक बडा तबका बुनियादी सुविधाओं जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और मकान आदी सुविधाओं से दूर, इनको पाने के लिये दर-दर भटकने के बावजूद खाली हाथ, नेताओ और नोकरशाहों के मुह तकता एक-एक गिरते आंसूओ के साथ अपनी उम्मीदो को खोता जा रहा है। बिहार के मुजफ़्फ़रपुर में ही अगर देखा जाये तो पिछले कई सालों में बेनाम बिमारी के चलते हजारीयों बच्चे मोत के मुह में चले गये। रही शिक्षा की बात तो मुफ़्त शिक्षा अधिकार कानून की जिस प्रकार द्जज्जिया उड़ी है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अभिभावको की लगभग हजारीयों की संख्या में कंप्लेन्टस धरी की धरी रह गयी, न ही कोई संतोषजनक कार्यवाही हुई और न ही शिक्षा अधिकार कानून का फ़ायदा शिक्षा से वंचित गरीब बच्चो को मिलता दिखाई दिया।

political debate

अब प्रश्न आता है कि इस सबके पीछे कोन है? तो घून फ़िर कर वहीं उस रास्ते पर अना पडता है, जो हमारे देश के रानेताओं के पास जाता है। यूपीए की सरकार राज में इस कदर लूट-खसौट मची हुई है, कि आने वाले इतिहास में “सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार के कालों की सरकार”, जैसा स्लोगन यूपीए सरकार  के लिये दर्ज हो जायेगा, यक कहना अतिश्योक्ति न होगी। 2जी घोटाला, आदर्श घोटाला, कोमनवेल्थ घोटाला और अभी एक और नया घोटाला हमारी केंद्र सरकार के काल में, कर्नाटक के लोकायुक्त संतोष हेगडे के मीडिया को दिये बयान से सामने आया है कि महज 14 महिने में ही कर्नाटक के मुख्यमंत्री येदुरप्पा ने अवेध खनन के जरिये करीब 1800 करोड़ रुपय का घोटाला कर, राजस्व को भारी-भरकम नुकसान पहुचा दिया। कहने को इन घोटालों से कोंग्रेस को बीजेपी पर कहानीयां गढने का मोका मिल गया हो, लेकिन देश की दो बड़ी राजनैतिक दल यानी बीजेपी और यूपीए दोनो की सच्चाई जनता के सामने है। सोचने वाली बात है, बोखलाहट इतनी है कि दोनो पार्टीयां एक दूसरे पर आड़े-तिरछे आरोप मंडने से भी नही चूक रही। आईबीएन7 पर चल रहे कार्यक्रम में बैठे लोकसभा सदस्य और नेता शकील अहमद पूरे देश के सामने बोखलाहट में यहां तक कह गये कि लोकायुक्त जैसी संस्था को ही खत्म कर देना चाहिये। सवाल उठता है कि क्या लोकायुक्त जैसी गरिमा पूर्ण संस्था को इसलिये खत्म कर देना चाहिये कि अब यह संस्था राजनेताओं द्वारा मचाई जा रही लूट-खसौट को जनता के सामने लाने की कोशिश कर रही है। लगातार देश को भारी राजस्व के नुकसान से आर्थिक असंतुलन देश की अर्थव्यवस्था पर अपना ठिया बनाये हुये है। इसके आलावा आज कमरतोड़ महंगाई आम समाज को किस कदर दुखी किये हुये है, उस दर्द का अंदाजा हमारे राजनेताओं और नोकरशाहों को शायद ही हो।

“देश के इन हालातो को देखते हुये सवाल है- क्या यही कल्पना की होगी?… कैसी क्ल्पना की होगी, क्या बन गया भारत!

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Filed under मेरी आखों से....., need for aware, Society in modern India

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