जन स्वास्थ की दशा:- मुहं तकता हुआ समाज, बुनीयादी सुविधाओं से अछूता आज भी…


बुनीयादी सुविधाओं से अछूता आज भी...

 इतिहास गवा है कि सन 1921 के बाद से ही जनसंख्या ने तीव्र गती से बढते हुये एक विशाल रूप धारण कर लिया है। आज जनसंख्या एक अरब को पार करते हुये एक सौ इक्कीस करोड के आकडे पर पहुंच गयी है। जिसका परिणाम आज भी हमारे सामने है जैसे दशको पहले भी देखा जाता था, वो यह कि आज वर्तमान में रहने वाला गरीब आम जन बुनियादी सुविधाओ से पूरी तरहं अछूता रह कर गरीबी की धूप में तप रहा है, क्योंकि गरीबी और बैरोजगारी उनका पीछा ही नही छोडती। काफ़ी हद तक अगर देखा जाये तो गरीबी और लाचारी ने ही भ्रष्टाचार जैसी बिमारी को जन्म दिया है या कहीये कि जल्द से जल्द शोर्ट-कट खोज कर पैसा कमाने की भूख को जन्म दिया। जिसका परिणाम यह हुआ है कि आज स्वाथ्य जैसी बुनियादी सुविधाओ पर किया जाने वाला हर एक रुपये में से केवल दस पैसे का लाभ ही वांछितो को मिल पाता है।
भ्रष्टाचार के लम्बे समय से चले आ रहे चक्रव्यूह ने अपनी जड़े बड़ी ही मजबूती से जमाली है। जो अब स्वास्थ क्षेत्र में भी तेजी से फ़ैलने लगी है। रिजल्ट सबके सबज के सामने है कि गरीब आमजन सरकारी स्वास्थ सेवाओं से आज भी अपने आपको बहुत दूर देखता है। कहना न हो कि वांछितो को लाभ पहुंचाने के लिये बहुतरी स्वास्थ योजनाये चलाई जाती रही हैं और चल भी रही है। पर इन सेवांओ का लाभ जरूरतमंदो को मिल पा रहा है या नही इस बात का सटीक अंदाजा लगा पाना कठिन है।          

स्वास्थ क्षेत्र

  पर अगर ताजा उदाहरण पर नजर डाली जाये तो पूरी तस्वीर उभर कर सामने आ जाती है। राजस्थान में एक अस्पताल में कोई 32 घटनाये दर्ज है, और यही नही यहां एक महिला ने एक साल में 24 संतानो को जन्म दिया और इसके अलावा 60 साल की एक महीला ने साल में दो बार संतान को जन्म दिया। गिनीज बुक के रिकोर्ड को तोड़ने वाले इन आंकड़ो से साफ़ जाहिर है कि यह हकिकत नही बल्कि एक नया घोटाला है। उस केंद्र की गर्भवस्था सेविकाओं ने केंद्र सरकार की जननी सुरक्षा योजना के तेहत गरीबी रेखा से नीचे गर्भवती महिला के लिये निर्धारित सहायता राशी को हड़पने के लिये गलत रिपोर्ट पेश की। जननी सुरक्षा योजना के तेहत गर्भवती महिला को 1700 रुपये और प्रत्येक प्रसव पर मिडवाईफ़ को इसके लिये 200 रुपये उसकी बेहतरी के लिये दिये जाते है। यह तो रही महिला स्वास्थ की बात और अगर हम “नेशनल फ़ैमिली हेल्थ सर्वे” द्वारा पेश की गयी 2005-2006 की रिपोर्ट पर नजर डाले तो सच्चाई के रूप में चौंकाने वाले तथ्य सामने आते  है। मेघालय, मध्यप्रदेश और झारखंड जैसे राज्यों में हर चार में से एक बच्चा कुपोषित पाया गया। इसके अलावा पूरी तरहं से सुविधायुक्त कहे जाने वाले क्षेत्र दिल्ली, मुम्बई, मेरठ में हर 10 में से 4 बच्चे कुपोषण का शिकार पाये गये। इन आंकड़ो से देश में जन स्वास्थ की दशा किस दशा का पूरा नही कफ़ी हद तक आभास हो रहा है। आज देश-समाज में वांछितो को स्वास्थ सुविधाओ के लाभ पहुंचाने के लिये गंभीर चिंतन जितना जरूरी लगता है उतने ही गंभीर प्रयास करने की भी बेहद अवश्यकता है।

 

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Filed under need for aware, Society in modern India

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