अन्ना की मुहिम और युवा जन-सहलाब का जूनून


youth

अन्ना ने देश में फ़ैले भ्रष्टाचार के विरुद्ध जो देशव्यापी मुहीम छेड़ी है उससे देश का हर एक वर्ग और युवा वर्ग धीरे-धीरे इतने बडे तादाद में लगातार जुड़ता चला जा रहा है कि अंदाजा नही लगाया जा सकता कि कितनी संख्या होगी। लोगो का जज़बा इस कदर बढ चुका है कि इसका अंदाजा अन्ना के जनलोकपाल बिल को अमलीजामा पहनाने के लिये रामलीला मैदान में उमड़ रही भीड़ से लगाया जा सकता है। तिलकब्रिज से लेकर रामलीला मैदान तक जाने वाली सड़क पर इधर-उधर नजर डाली जाये तो ऐसा अनुभव होता है कि जिन लोगों की भीड़ या जो भी लोग आगे आगे बढते जा रहे हैं, जैसे आगे कोइ मेला लगा हो, पर आगे कोई मेला नही, दरसल वें सभी लोग अन्ना के समर्थन के लिये रामलीला मैदान की और कूच करते दिख रहे है। यूपीए सरकार के अड़ियल और तीखे रुख को देखते हुये अन्ना और अन्ना के साथ संघर्ष में जुटा आमजन तथा खासकर यूवा वर्ग की एक कड़े लोकपाल बिल 30 अगस्त तक लाने की उम्मीदें पूरी हो पायेगीं मुश्किल सा लग रहा है पर ज्यादा मुश्किल भी नही है।

people

सरकार समझोता करने के लिये इधर-उधर हाथ फ़ैकेंगी यह तय है। पर अभी जो बात परेशान करने वाली है, वो ये कि कहां सरकार तीखे शब्दो के वार कर रही थी और अन्ना को अनशन अपनी नई-नवेली शर्तो को थोपकर अनशन की जगहां न देने पर पूरी तरहं अड़ी हुई थी, वहीं अचानक अनशन के लिये जगहां की इज़ाजत देदी गयी, और वो भी रामलालीला मैदान में। अगर हम यह मान लें कि सरकार इतने बड़े जनसहलाब को देखकर डर गयी, तो यह सरासर गलत सोचना है। दरसल सरकार तो पहले ही जानती है अगर अन्ना ने आवाज बुलंद की तो उसके साथ देश भर में कई आवाजे बुलंद होंगी। क्योंकि अन्ना एक बार तो अनशन कर नही रहे बल्कि वह तो समाजिक सुधार करने के लिये ही जीवनभर संघर्ष करते आये है। इतना तो तय है कि यूपीए सरकार के पास कोई न कोई खिचडी जरूर पक रही है।

MP of congress

“अन्ना बात करें, साथ मिलकर काम करें और हम साथ मिलकर समस्याओं का हल निकालेंगे” यह बात कही है कोंग्रेस के प्रवक्ता राशिद अल्वि ने सारी दुनिया के सामने आईबीएन7 पर चल रही चर्चा के दौरान संदीप चौधरी जी के बीच का रास्ता खोजने को लेकर एक प्रश्न के जवाब में। इन बातो से साफ़ झलक रहा है कि अन्ना को राजनीति में आकर सरकार से हाथ मिलाकर काम करने के लिये खुली दावत है। कहीं हमारी यूपीए सरकार यही तो नही चाहती? यह एक बहस का प्रश्न हो सकता है।
अन्ना के जनलोकपाल के समर्थन में जुटे कुछ यूवा वर्ग कि राय जानने पर उन लोगो की बात गलत साबित हो जाती है जो सोचते है और कहते है कि जो लोग अन्ना के लोकपाल के समर्थन में खड़े हो रहे है उनको लोकपाल के बारे में कूछ मालूम ही नही। बल्कि हकीकत तो यह है कि देश का यूवा जनलोकपाल के बारे में केवल जानते ही नही अच्छी तरह समझते भी है। साथ ही साथ सरकारी लोकपाल बिल और अन्ना के लोकपाल बिल में अंतर भी बखूबी समझते है।

दिल्ली विश्वविधालय के किरोरीमल कोलेज में पढने वाले राजनीति विषय के छात्र आशिश सिंह ने अपनी बैबाक जबान में आपनी राय देते हुये कहा कि प्रधानमंत्री,एमपी,एमएलए और यहां तक की न्यायपालिका को भी लोकपालबिल के दायरे में लाना बेहद जरूरी है।

A girl dedicated

यूवाओं का जज़बा देखने लायक है:-रामलीला मैदान की हालत बारिश होने से इस कदर खराब है कि जहां पैर रखा वहीं धसं जा रहा है पर इससे यूवाओ में जज़बा कम हुआ ऐसा बिलकुल नही दिख रहा बल्कि देश के यूवा और बच्चे व महिलाएं सभी अपने हाथो से ही जमीन को समथल बनाने में जुटे हुये है और जगह-जगह भरे हुये पानी को हाथो से ही नाली बना कर बाहर की ओर बहा रहे हैं।

youth is dedicated

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Filed under मेरी आखों से....., need for aware, Society in modern India

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